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"मेरी हिंदी थोड़ी कमजोर है "

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ये शब्द अकसर हमारे कानों को रोमांचित कर जाते हैं ” मेरी हिंदी थोड़ी कमजोर है ” ,
हिंदी शब्दकोष में एक लाख बीस हज़ार शब्दों का संग्रह है, और आज की पीढ़ी 10 शब्दों का एक वाक्य भी शायद ही हिंदी के शब्दों का इस्तेमाल करके बोल पायेगी | मुझे हिंदी आती है, कहना काफी आसान है, पर इस बात का मतलब समझना एक ठेडी खीर है | हमारे भारत की राज्यभाषा की इस स्थिति के जिम्मेदार हम ही हैं , परन्तु हम खुद इस बात पर यकीन नहीं करते | आज एक शुद्ध हिंदी प्रयोग करने वाला वक्ता उपहास का केंद्र बन जाता है एवं उस व्यक्ति के साथ साथ भाषा भी कुंठित महसूस करती है |
संस्कृत से जन्मी हिंदी भाषा की इस दयनीय दशा की हम व्यथा ही सुना सकते है | प्रयास सिर्फ एक शब्द के समान रह गया है | ग्रामीण इलाकों में टूटी फूटी हिंदी के साथ हिंदी अपना स्वरुप खो रही है वहीँ शहरी इलाकों में तो ये भाषा खुद के अस्तित्व को दिन ब दिन ढलते हुए सूर्य के समान खोते हुए देख रही है |
हिंदी को आज केवल मंच ही नही अस्तित्व भी चाहिए , वो खोयी हुई विरासत , वो आत्मसम्मान , वो रुतबा , वो पहचान , वो तेज़ और वो सब कुछ जो इस महान भाषा का था और जो इस भाषा की महानता को बयान करें |

अगर हम कोई बीज बोते है तो पानी, सूर्य की किरण, और पूर्ण देखभाल भी ज़रूरी होती है | जब वो पौधा बनता है फिर पेड़ में तब्दील होता है तो हम उसकी देखभाल में कटौती कर देते हैं और यही हमारी हिंदी भाषा के साथ हो रहा है ये भाषा एक बुढा पेड़ बन कर रह गयी है , जिसकी कराहती हुई टहनियों पर भी हमारी निगाहें बस सहानुभूति प्रकट करती है |
हमें इस भाषा को पुनः जीवित करना होगा , इस एक पेड़ से कई अंकुरों को विकसित करना होगा , बूँद बूँद से सागर बनता है तो इस भाषा के असीम शीतल अमृतत्व सागर को फिर से जीवित करना होगा , समय है एक मंथन का और वो समय अब है , अभी है |
हम सब को आगे आ कर इस भाषा को उसका सम्मान दिलाना होगा , खुद के साथ साथ दूसरों को भी इस जन जाग्रति में शामिल करना होगा , इस भाषा का वजूद कई महान सख्शियतो के साथ साथ हमारी आगामी पीढ़ी से भी जुडा है , आगे बढ़ कर हमें हिंदी के प्रचार प्रसार का सारथि बनना होगा , भगवत न सही लेकिन भाषा का प्रसार करना होगा , कलयुग में कृष्ण भले न आ सके पर इस सन्देश को हमें ही विश्व में फैलाना पड़ेगा |

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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

MRIDUL SAXENA के द्वारा
September 29, 2013

dhanyavaad Santlal ji , aapke margdarshan ke liye

MRIDUL SAXENA के द्वारा
September 29, 2013

thank you satya sheel ji

MRIDUL SAXENA के द्वारा
September 29, 2013

shukriya ritu ji hum iss koshish ko jaari rakhenge

MRIDUL SAXENA के द्वारा
September 29, 2013

shukriya, zarur


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